Mumbai crime story

Saddam Husain story

📖 चैप्टर 1: एक बच्चे का जन्म — दर्द, गरीबी और एक अनकही शुरुआत 28 अप्रैल 1937… 🌑 मध्य पूर्व की तपती हुई ज़मीन पर बसे देश Iraq के एक छोटे से गाँव Al-Awja में, जो Tikrit के पास था, एक ऐसा बच्चा जन्म ले रहा था जिसकी कहानी दुनिया को बाद में हिला देगी, लेकिन उस पल… उस पल वहाँ सिर्फ दर्द था, सन्नाटा था और गरीबी की भारी चादर पूरे माहौल पर पड़ी हुई थी 😔 उस झोपड़ी की हालत ऐसी थी कि छत के कोनों से हवा अंदर घुसती थी, दीवारें मिट्टी की थीं और फर्श पर बिछी एक पुरानी चटाई ही उस घर की असली पहचान थी, वहीं एक माँ अपने बच्चे को जन्म देने की पीड़ा सह रही थी, उसका नाम था सुभा तुल्फ़ाह, एक ऐसी औरत जो पहले ही जिंदगी से टूटी हुई थी 💔 उसका पति, हुसैन अब्द अल-मजीद, इस दुनिया में नहीं था… कुछ लोग कहते हैं वह मर चुका था, कुछ कहते हैं वह छोड़कर चला गया था, लेकिन सच्चाई यही थी कि उस बच्चे के जन्म से पहले ही उसके सिर से पिता का साया उठ चुका था 😢 उस माँ की हालत सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी बेहद खराब थी, उसने पहले भी एक बेटे को खो दिया था और अब वह इस नए बच्चे को जन्म देने से डर रही थी 😣 ...

“अब्दुल लतीफ़

“अब्दुल लतीफ़ – राजनीति और अपराध का खेल”

अहमदाबाद की गलियों में उसका नाम ही कानून था।
लोग पुलिस से नहीं, लतीफ़ के ग़ुस्से से डरते थे।
वो सिर्फ़ सड़क का बादशाह नहीं था — उसकी पहुँच सियासत के गलियारों तक थी।
जहाँ आम आदमी वोट मांगने जाता था, वहाँ लतीफ़ को वोट बाँटने का हक़ था।
नेता उसकी चौखट पर झुकते, और अफ़सर उसकी नज़रों से बचकर निकलते।

उसका नेटवर्क इतना मजबूत था कि शहर की हर गली, हर कारोबार, हर सौदा उसकी इजाज़त से चलता था।
एक इशारा और पूरी मशीनरी काम में लग जाती — चाहे वो चुनाव हो या शराब का धंधा।
कहते हैं, लतीफ़ ने सिर्फ़ अपराध नहीं किया, उसने अपराध को सिस्टम बना दिया।
जो उसके खिलाफ़ गया, या तो गायब हो गया या झुक गया।

अहमदाबाद का हर कोना उसकी मौजूदगी से कांप उठता था।
लेकिन वक्त ने दिखाया — जो सियासत के सहारे ऊपर जाता है, वो उसी सियासत के बोझ तले दब भी जाता है।
लतीफ़ का नाम आज भी गूंजता है… ताक़त, डर और सियासी चालों की मिसाल बनकर।






टिप्पणियाँ